शादी में सबसे बड़ी समस्या होती है – देरी। दूल्हा देर से आता है, बारात देर से पहुँचती है, और फिर फोटोग्राफर पर दबाव आता है कि "जल्दी शूट करो, समय नहीं है।" आज मैं (कुसुम ग्राफिक्स) इस विषय पर दोनों की नज़र से बात करना चाहता हूँ।
फोटोग्राफर के लिए – समय क्यों जरूरी है?
अगर सूरज ढल गया, तो नेचुरल लाइट चली जाएगी – फोटो में वो जादू नहीं आएगा।
अगर बारात देर से आई, तो मंडप के शॉट्स के लिए समय कम पड़ेगा।
अगर विदाई देर से हुई, तो अगली सुबह का शेड्यूल बिगड़ जाएगा।
फोटोग्राफर के पास भी एक सीमा होती है – 12-14 घंटे लगातार काम करना आसान नहीं है।
ग्राहक के लिए – समय क्यों जरूरी है?
अगर शेड्यूल सही रहेगा, तो सभी रस्में आराम से होंगी।
फोटोग्राफर को हर मोमेंट कवर करने का समय मिलेगा।
देर से आने पर फोटोग्राफर जल्दबाजी में कुछ शॉट्स छोड़ सकता है।
समय पर शादी खत्म होने से मेहमान भी खुश रहते हैं।
तो देरी किसकी गलती? सच कहूँ तो – किसी की नहीं। शादी में कई चीज़ें होती हैं जो हमारे हाथ में नहीं होतीं – बारात, मौसम, बिजली, या रस्मों का समय। लेकिन एक अच्छा फोटोग्राफर और समझदार ग्राहक मिलकर इसे मैनेज कर सकते हैं।
हमारी सलाह: फोटोग्राफर को शादी से पहले पूरा शेड्यूल लिखकर लेना चाहिए – कौन सी रस्म कब होगी। ग्राहक को कोशिश करनी चाहिए कि शेड्यूल से 30-60 मिनट का बफर रखें। अगर देरी हो भी जाए, तो फोटोग्राफर को पहले बता दें, ताकि वह अपना प्लान बदल सके। जब दोनों मिलकर काम करेंगे, तो देरी भी मायने नहीं रखेगी।
