सेकंड हैंड कैमरा खरीदने से पहले ये 12 बातें जरूर देखें

नया कैमरा खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं होती। खासकर जब आप शादी की फोटोग्राफी शुरू कर रहे हों, तो शुरुआत में जेब इतनी गहरी नहीं होती कि 80 हज़ार-1 लाख का नया कैमरा ले लें। ऐसे में सेकंड हैंड कैमरा एक अच्छा विकल्प है। आधे दाम में अच्छा कैमरा मिल जाता है।

लेकिन यहीं सबसे बड़ा खतरा है। सेकंड हैंड मार्केट में ठगों की कमी नहीं। कोई खराब कैमरा चमकाकर बेच देता है, कोई पुराना शटर काउंट छिपा देता है, कोई चोरी का माल बेच देता है। और बाद में पछताना पड़ता है।

मैंने अपने अनुभव में देखा है कि बहुत लड़के सस्ता कैमरा देखकर लालच में आ जाते हैं, और बाद में पता चलता है कि कैमरा तो खराब है। तो आज बताता हूँ कि सेकंड हैंड कैमरा खरीदने से पहले क्या-क्या देखना चाहिए। पूरी पोस्ट ध्यान से पढ़िए, पैसा बचेगा।

अपने कैमरे  चेक करते हुए



पहली बात: शटर काउंट जरूर चेक करें

ये सबसे जरूरी बात है। शटर काउंट का मतलब है कि कैमरे ने कितनी फोटो खींची हैं। हर कैमरे की एक उम्र होती है। एंट्री लेवल कैमरा 50 हज़ार से 1 लाख शटर तक चलता है। प्रोफेशनल कैमरा 2-3 लाख शटर तक चलता है।

अगर शटर काउंट बहुत ज्यादा है, तो कैमरा जल्दी खराब हो सकता है। शटर बदलने में 8-10 हज़ार का खर्चा आता है।

शटर काउंट कैसे चेक करें? कई तरीके हैं। कुछ कैमरे में मेनू में दिख जाता है। कुछ में सॉफ्टवेयर से चेक करना पड़ता है। या फिर फोटो की EXIF फाइल में देख सकते हैं। अगर विक्रेता शटर काउंट बताने से मना करे, तो समझ जाइए कि कुछ गड़बड़ है। वहां से न खरीदें।

दूसरी बात: सेंसर चेक करें

सेंसर कैमरे की आंख होती है। अगर सेंसर खराब है, तो पूरा कैमरा बेकार है। सेंसर की जांच कैसे करें?

  • सफेद दीवार की फोटो लें: कैमरे को मैनुअल मोड में रखें, अपर्चर f/16 या f/22 करें, और सफेद दीवार की फोटो लें।

  • फोटो को कंप्यूटर पर देखें: अगर फोटो में काले धब्बे दिखें, तो सेंसर पर धूल या स्क्रैच है।

  • स्क्रैच अलग होते हैं: धूल तो साफ हो जाती है, पर स्क्रैच नहीं जाता। स्क्रैच वाला सेंसर बेकार है।

  • हॉट पिक्सल देखें: अंधेरे में ढक्कन लगाकर फोटो लें। अगर फोटो में लाल, हरे या नीले बिंदु दिखें, तो हॉट पिक्सल है।

तीसरी बात: लेंस अच्छे से देखें

अगर लेंस के साथ कैमरा मिल रहा है, तो लेंस को बहुत ध्यान से देखें।

  • सामने का ग्लास: इसमें स्क्रैच, फंगस या धुंधलापन न हो।

  • फंगस: फंगस एक प्रकार की फफूंद होती है जो लेंस के अंदर जम जाती है। ये धीरे-धीरे लेंस को खराब कर देती है। अगर लेंस में जाले जैसी चीज दिखे, तो वो फंगस है। ऐसा लेंस न खरीदें।

  • धूल: लेंस के अंदर धूल के कण दिखें तो कोई बड़ी बात नहीं, पर ज्यादा धूल हो तो न लें।

  • जूम और फोकस रिंग: इन्हें घुमाकर देखें। अगर अटक रही हो या आवाज करे, तो लेंस खराब है।

  • अपर्चर ब्लेड: अपर्चर को अलग-अलग सेटिंग पर रखकर देखें। अगर ब्लेड अटक रहे हों, तो लेंस में दिक्कत है।

चौथी बात: बॉडी की हालत देखें

कैमरे की बॉडी को चारों तरफ से देखें।

  • डेंट और क्रैक: अगर कैमरे पर गिरने के निशान हैं, तो अंदर भी नुकसान हो सकता है।

  • रबर ग्रिप: रबर ग्रिप अगर घिस गई है, तो कैमरा बहुत इस्तेमाल हुआ है।

  • बटन: सारे बटन दबाकर देखें। अगर कोई बटन अटक रहा हो या काम न करे, तो दिक्कत है।

  • डायल: मोड डायल और अन्य डायल घुमाकर देखें। अगर आवाज करे या अटके, तो न लें।

  • स्क्रू: बॉडी के स्क्रू देखें। अगर स्क्रू के सिर खराब हैं, तो कैमरा खोला गया है। यानी रिपेयर हुआ है।

पांचवीं बात: डिस्प्ले और व्यूफाइंडर

  • डिस्प्ले: डिस्प्ले पर स्क्रैच, दरार या डेड पिक्सल न हो। डिस्प्ले चमक कम करके देखें, ताकि धब्बे दिख जाएं।

  • व्यूफाइंडर: व्यूफाइंडर में धूल या धुंधलापन न हो। अगर साफ दिख रहा हो, तो ठीक है।

  • टच स्क्रीन: अगर टच स्क्रीन है, तो सारे कोने छूकर देखें। कहीं रिस्पॉन्स न करे, तो दिक्कत है।


छठी बात: बैटरी और चार्जर

  • बैटरी: बैटरी की हालत देखें। अगर बैटरी फूल गई है, तो न लें। फूली बैटरी खतरनाक होती है।

  • बैटरी बैकअप: बैटरी चार्ज करके देखें कि कितनी देर चलती है। अगर 10-15 मिनट में खत्म हो जाए, तो बैटरी खराब है।

  • चार्जर: ओरिजिनल चार्जर है या नहीं। डुप्लीकेट चार्जर कैमरे को नुकसान पहुंचा सकता है।

  • बैटरी की कीमत: नई बैटरी 2-4 हज़ार की आती है। अगर बैटरी खराब है, तो उतना खर्चा और जोड़ लें।

सातवीं बात: मेमोरी कार्ड स्लॉट

  • कार्ड डालकर देखें: कार्ड डालकर फोटो लें और देखें।

  • कार्ड पढ़ रहा है या नहीं: अगर कार्ड बार-बार एरर दे रहा हो, तो स्लॉट में दिक्कत है।

  • पिन मुड़े न हों: स्लॉट के पिन देखें। अगर मुड़े हों, तो रिपेयर में खर्चा आएगा।

आठवीं बात: शटर और मिरर

  • शटर की आवाज: शटर की आवाज सुनें। अगर आवाज अजीब हो या अटके, तो दिक्कत है।

  • मिरर: DSLR में मिरर देखें। अगर मिरर पर धूल या स्क्रैच हो, तो सावधानी रखें।

  • लाइव व्यू: लाइव व्यू में फोकस करके देखें। अगर फोकस ठीक से न हो, तो ऑटोफोकस में दिक्कत है।

नौवीं बात: वीडियो फंक्शन

अगर आप वीडियोग्राफी भी करेंगे, तो वीडियो फंक्शन जरूर चेक करें।

  • वीडियो रिकॉर्ड करें: 1-2 मिनट का वीडियो बनाएं।

  • ऑडियो चेक करें: माइक काम कर रहा है या नहीं।

  • ऑटोफोकस: वीडियो में ऑटोफोकस ठीक से काम कर रहा है या नहीं।

  • हेडफोन जैक: हेडफोन लगाकर देखें, आवाज आ रही है या नहीं।

दसवीं बात: वाई-फाई और ब्लूटूथ

  • वाई-फाई: अगर कैमरे में वाई-फाई है, तो कनेक्ट करके देखें।

  • ब्लूटूथ: ब्लूटूथ से फोन से कनेक्ट करके देखें।

  • ऐप: कंपनी का ऐप डाउनलोड करके टेस्ट करें।


ग्यारहवीं बात: बिल और वारंटी

  • बिल मांगें: ओरिजिनल बिल मांगें। अगर बिल नहीं है, तो चोरी का माल हो सकता है।

  • वारंटी: अगर वारंटी बची है, तो और अच्छा। वारंटी कार्ड मांगें।

  • सीरियल नंबर: कैमरे का सीरियल नंबर बिल से मिलाएं।

  • बॉक्स और सामान: ओरिजिनल बॉक्स, चार्जर, केबल, स्ट्रैप — सब मांगें।

बारहवीं बात: विक्रेता को पहचानें

  • भरोसेमंद विक्रेता: किसी जान-पहचान वाले से खरीदें, या अच्छी रेटिंग वाले ऑनलाइन विक्रेता से।

  • सामने बैठकर चेक करें: ऑनलाइन खरीद रहे हों, तो सामने बैठकर चेक करें। वीडियो कॉल पर भी चेक कर सकते हैं।

  • जल्दबाजी न करें: जल्दबाजी में खरीदने से धोखा होता है। 2-3 दिन लगाएं, अच्छे से चेक करें।

  • रेट कंपेयर करें: ऑनलाइन और ऑफलाइन रेट कंपेयर करें। ज्यादा सस्ता मतलब कुछ गड़बड़ है।

  • ग्राहक समीक्षा देखें: ऑनलाइन विक्रेता की समीक्षा देखें।

धोखे से कैसे बचें

  • बहुत सस्ता माल: अगर बाजार से बहुत सस्ता मिल रहा है, तो समझ जाइए कि कुछ गड़बड़ है।

  • जल्दी करने का दबाव: अगर विक्रेता कहे कि जल्दी ले लो, और कोई और लेने वाला है, तो सावधान रहें।

  • एडवांस मत दें: बिना देखे एडवांस मत दें।

  • बैंक ट्रांसफर: नकद में लेन-देन करें, ताकि सबूत रहे। या UPI से करें, ताकि रिकॉर्ड रहे।

  • रसीद लें: लिखित में रसीद लें, जिसमें सीरियल नंबर और कीमत लिखी हो।

कौन सा कैमरा खरीदें

अगर आप शादी की फोटोग्राफी शुरू कर रहे हैं, तो सेकंड हैंड में ये कैमरे अच्छे रहते हैं:

  • कैनन: 200D, 700D, 80D, 6D

  • निकॉन: D5300, D5600, D7200, D610

  • सोनी: A6000, A6300, A7 II

ये सब अच्छे कैमरे हैं, और सेकंड हैंड में बजट में मिल जाते हैं।

कितना पैसा लगेगा

  • एंट्री लेवल: 15-25 हज़ार

  • मिड रेंज: 30-50 हज़ार

  • प्रोफेशनल: 60 हज़ार से ऊपर

लेंस अलग से लगेंगे। एक अच्छा 50mm लेंस 6-10 हज़ार में मिल जाता है। जूम लेंस 15-30 हज़ार तक।

कुछ और जरूरी बातें

  • खरीदने से पहले 2-3 दिन रिसर्च करें

  • यूट्यूब पर चेक करने का तरीका देखें

  • किसी अनुभवी फोटोग्राफर को साथ लेकर जाएं

  • फोटो खींचकर कंप्यूटर पर देखें, कैमरे की स्क्रीन पर नहीं

  • मोलभाव जरूर करें, 10-15 प्रतिशत तक कम हो जाता है

  • खरीदने के बाद 7 दिन की टेस्टिंग करें

आखिरी बात

सेकंड हैंड कैमरा खरीदना बुरा नहीं है। बहुत अच्छे कैमरे आधे दाम में मिल जाते हैं। लेकिन धोखे से बचना जरूरी है। जल्दबाजी न करें, अच्छे से चेक करें, और भरोसेमंद विक्रेता से ही खरीदें।

याद रखिए, कैमरा आपका साथी है। अगर साथी खराब होगा, तो काम भी खराब होगा। इसलिए थोड़ा समय लगाइए, थोड़ा रिसर्च कीजिए, और फिर फैसला कीजिए। एक बार अच्छा कैमरा ले लिया, तो सालों चलेगा।